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West Bengal Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- जिनकी अपील मंजूर, वो दे सकेंगे वोट; बंगाल सरकार को बड़ी राहत

बंगाल में एसआईआर मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 की शक्तियों का प्रयोग किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन व्यक्तियों की अपील अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunal) द्वारा मंजूर की जाएगी, उन्हें 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान करने की अनुमति दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस न्यायालय द्वारा स्थापित बहुस्तरीय सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि यदि अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा अपील स्वीकार कर ली जाती है. समावेशन या अपवर्जन के लिए कोई निर्णायक निर्देश जारी किया जाता है, तो ऐसे निर्देशों को पश्चिम बंगाल राज्य द्वारा 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान करने से पहले विधिवत रूप से प्रभावी किया जाना चाहिए.

जिनकी अपील मंजूर, वो दे सकेंगे वोट

राज्य में पहले फेज की वोटिंग 23 अप्रैल को है. दूसरे फेज की वोटिंग 29 अप्रैल को है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले फेज की वोटिंग में राज्य के 152 चुनाव क्षेत्रों में जिन वोटर्स के नाम ट्रिब्यूनल द्वारा मंजूर किए गए हैं. 21 अप्रैल तक वोट देने की इजाजत दी गई है, उन्हें वोट देने की इजाजत दी जाएगी.

दूसरे फेज के लिए डेडलाइन 27 अप्रैल है. अगर ट्रिब्यूनल एप्लीकेशन को मंजूरी देता है तो वे लोग वोट दे पाएंगे. हालांकि, जिन वोटर्स के नाम ट्रिब्यूनल द्वारा खारिज कर दिये जाते हैं. वे वोट नहीं पाएंगे. जिन मतदाताओं को ट्रिब्यूनल की ओर से मंजूरी दी जाएगी. उनके लिए चुनाव आयोग की ओर से पूरक मतदाता सूची जारी की जाएगी. उस सूची के आधार पर मतदाता मतदान कर पाएंगे.

चुनाव के लिए नॉमिनेशन फाइल करने के आखिरी दिन कमीशन ने वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज’ कर दिया है. इस बार सुप्रीम कोर्ट ने अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल किया है.

SC ने अनुच्छेद 142 की शक्तियों का किया प्रयोग

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ट्रिब्यूनल वोटिंग से दो दिन पहले तक विचाराधीन वोटरों के एप्लीकेशन के निपटारे के बाद लिस्ट में उनके नाम शामिल करने के लिए क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करेगा. हालांकि, विचाराधीन वोटरों के एप्लीकेशन का निपटारा ट्रिब्यूनल को ही करना होगा. सिर्फ वहां अप्लाई करना काफी नहीं होगा.

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया शुरू होने से पहले बंगाल में कुल 7,66,37,529 मतदाता थे. 28 फरवरी को आई पहली सूची में ही करीब 63.66 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि 60,06,675 नामों को विचारणाधीन श्रेणी में रखा गया था.

इनमें से 27 लाख 16 हजार 393 लोग अयोग्य पाए गए, जबकि 32 लाख 68 हजार 119 को पात्र मानकर सूची में बहाल किया गया है. मौजूदा समय में राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या अब 6,77,20,728 रह गई है.

सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी कहा कि 16 लाख अपीलें लंबित हैं. कृपया उनका निपटारा किया जाए. जस्टिस बागची ने कहा कि हाईकोर्ट सीजे ने हमें रिपोर्ट किया है कि अपीलें 34,35,000 के करीब हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ममता ने किया स्वागत

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की. उन्होंने राज्य के लोगों को बधाई दी. उन्होंने पार्टी वर्कर्स को अलग से इंस्ट्रक्शन भी दिए. ममता बनर्जी ने याद दिलाया कि उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में SIR केस फाइल किया था. इसलिए इस फैसले के बाद उनसे ज्यादा खुश कोई नहीं है.

ममता बनर्जी चुनाव प्रचार के लिए नॉर्थ बंगाल में हैं. उन्हें कूचबिहार में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर मिली. कूचबिहार में हेलीपैड पर उतरते ही ममता बनर्जी ने कहा, “सभी को बधाई. दिनहाटा से हेलीकॉप्टर में बैठते ही मुझे खुशखबरी मिली. मैं शुरू से कह रही थी, सभी लोग सब्र रखें. मैं बहुत खुश हूं. ज्यूडिशियरी पर गर्व है. मैंने केस फाइल किया. इसलिए आज मुझसे ज्यादा खुश कोई नहीं है.”

ममता ने पार्टी कार्यकर्ताओं को दिए ये निर्देश

ममता बनर्जी ने पार्टी वर्कर्स को खास इंस्ट्रक्शन भी दिए. उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल का काम खत्म होने के बाद पार्टी वर्कर्स को घर-घर जाकर वोटर स्लिप बांटनी होगी.

ममता बनर्जी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पहले चरण के लिए वोटरों की अतिरिक्त लिस्ट चुनाव से दो दिन पहले 21 तारीख को जारी की जाएगी. जब मुझे यह मिल जाएगी, तो मैं सभी बूथ कार्यकर्ताओं और नेताओं से कहूंगी कि वे वोटर स्लिप तैयार करें और उसी रात तक उनके घरों तक पहुंचा दें. ताकि जिनके नाम छूट गए हैं, वे वोट दे सकें.”

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अतिरिक्त लिस्ट भी 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग से दो दिन पहले जारी की जाएगी.