Career After 10th: 10वीं के बाद सही स्ट्रीम कैसे चुनें? करियर काउंसलर की अभिभावकों को सलाह- बच्चे की रुचि को न करें नजरअंदाज
पंचकूला: केंद्रीय स्कूल शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा दसवीं कक्षा के परिणाम 15 अप्रैल को घोषित कर दिए गए हैं. वहीं, हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा भी मई महीने के पहले-दूसरे सप्ताह तक दसवीं कक्षा के परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे. इस समय अधिकांश छात्र-छात्राओं में अपने पसंदीदा विषयों और स्ट्रीम का चयन करने की उलझन बनी होती है. क्योंकि इससे आगे की शिक्षा और पसंदीदा क्षेत्र में स्वयं को स्थापित करने का सफर इसी स्तर से शुरू होता है. नतीजतन, छात्रों समेत परिजनों के समक्ष भी बच्चों के लिए सही स्ट्रीम चुनना एक महत्वपूर्ण फैसला होता है. छात्रों की इस उलझन को कम करने के लिए ईटीवी भारत ने हरियाणा शिक्षा विभाग से सेवानिवृत प्रिंसिपल एवं वर्तमान में करियर काउंसलर, डॉक्टर पवन गुप्ता से बातचीत की.
‘परिजन बच्चों की पसंद को समझें’: डॉक्टर पवन गुप्ता ने कहा कि “परिजनों को अपने बच्चों की पसंद को समझना चाहिए कि वो किस स्ट्रीम में जाना चाहते हैं, किन विषयों का चुनाव करना चाहते हैं. क्योंकि अधिकांश परिजन ये गलती कर जाते हैं कि वे रिश्तेदारों या दोस्तों के दबाव में आकर अपने बच्चों की रुचि के खिलाफ उन्हें विषय दिलवा देते हैं, नतीजतन बच्चे उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाते. सफल करियर के लिए छात्रों की रूचि-क्षमता और सही मार्गदर्शन जरूरी होता है. ऐसा होने पर छात्र-छात्राओं को सफलता मिलना निश्चित है.”
साइंस, कॉमर्स और आर्टस किसे चुनें? डॉक्टर पवन गुप्ता ने कहा कि “छात्र और उनके परिजन अकसर इस उलझन में रहते हैं कि बच्चों के लिए किस स्ट्रीम का चयन करना अधिक उचित होगा. ऐसे में सबसे जरूरी है कि पहले बच्चों की पसंद को समझा जाए और दसवीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही स्ट्रीम का चयन करना अधिक उचित रहता है. यदि छात्र मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायो में रुचि रखते हैं, तो साइंस स्ट्रीम का चुनना सही है. लेकिन साइंस विषय का चुनाव तभी करें, जब छात्र अधिक मेहनत कर सकते हों. यदि ऐसा नहीं है तो साइंस की ओर जाना सही नहीं.”
मेडिकल और इंजीनियरिंग? डॉ. गुप्ता ने बताया कि “यदि छात्र फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायो विषय चुनते हैं, तो मेडिकल स्ट्रीम की ओर बढ़ना अधिक फायदेमंद हो सकता है. वहीं, बच्चे यदि इंजीनियरिंग की तरफ जाना चाहते हैं, तो मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री विषयों को चुनना सही हो सकता है. यदि छात्र कैलकुलेशन, बिजनेस और फाइनेंस में अधिक रुचि रखते हैं, तो उनके लिए कॉमर्स स्ट्रीम चुनना सही रहेगा. क्योंकि देश बिजनेस हब बनता जा रहा है, ऐसे में इस स्ट्रीम के छात्रों के लिए व्यापक प्लेटफार्म उपलब्ध होने की उम्मीद है.”
आर्ट्स स्ट्रीम में व्यापक अवसर: डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि “छात्रों को आर्ट्स स्ट्रीम को भी कमजोर नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि आर्ट्स के माध्यम से छात्र यूपीएससी परीक्षा के जरिए आईएएस/आईपीएस/आईआरएस समेत अन्य विभिन्न क्षेत्रों और स्टेट सर्विसेज के अलावा कानून के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकते हैं. मैथ्स और इकोनॉमिक्स का कॉम्बिनेशन भी अच्छा रहता है, लेकिन हर जगह छात्रों द्वारा अपना शत् प्रतिशत देना जरूरी होता है.”
‘छात्र घबराएं नहीं’: डॉक्टर पवन गुप्ता ने कहा कि “मैट्रिक अंतिम चरण नहीं है, नतीजतन, छात्रों को घबराना नहीं चाहिए, बल्कि 11वीं कक्षा में दोबारा विषयों का चुनाव कर कामयाबी हासिल करनी चाहिए. इसके अलावा अब बोर्ड द्वारा भी दूसरा मौका दिया जा रहा है. यदि छात्रों के किसी विषय में कम अंक आते हैं तो उन्हें दोबारा परीक्षा देकर ठीक किया जा सकता है. किसी एक कक्षा में अच्छे नंबर नहीं आने का मतलब यह नहीं है कि छात्र विषय में कमजोर हैं या अच्छा नहीं किया जा सकते.”
स्कॉलरशिप के लिए सुपर 100 बनें: डॉक्टर पवन गुप्ता ने बताया कि “आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों के लिए केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई गई हैं, जिनका स्कॉलरशिप के रूप में फायदा लिया जा सकता है. हरियाणा सरकार द्वारा सुपर 100 योजना ऐसी है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों/छात्रों को पढ़ाई पर आने वाले खर्च की चिंता नहीं है. यदि छात्र होनहार हैं, लेकिन इंजीनियरिंग या मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं तो वो सुपर 100 परीक्षा पास करें. ऐसे छात्रों की पढ़ाई का खर्च दो वर्ष तक हरियाणा सरकार द्वारा वहन किया जाता है.”
आईटीआई/टेक्निकल पढ़ाई का भी मौका: डॉक्टर पवन गुप्ता ने बताया कि मैट्रिक के बाद छात्रों के पास आईटीआई और टेक्निकल शिक्षा हासिल करने का भी मौका रहता है. उन्होंने कहा कि थ्योरी के साथ यदि छात्रों के पास टेक्निकल सपोर्ट हो तो कामयाबी मिलने के अधिक अवसर रहते हैं. छात्र आईटीआई/पॉलिटेक्निक का चुनाव कर सकते हैं, क्योंकि समय के साथ इन क्षेत्रों में भी अवसर काफी बढ़े हैं.
नए कौशल और प्रतियोगी परीक्षा: स्ट्रीम (साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स) का चयन, कंप्यूटर कोडिंग/एआई जैसे नए कौशल सीखने, प्रतियोगी परीक्षाओं (एनटीएसई, ओलंपियाड) की तैयारी, 11वीं के फाउंडेशन कोर्स, और करियर काउंसलिंग लेने जैसी महत्वपूर्ण योजना बना सकते हैं. ये समय अपने शौंक को निखारने का भी होता है. यदि छात्र डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहते हैं तो 11वीं-12वीं की तैयारी के लिए फाउंडेशन कोर्स अभी से शुरू कर सकते हैं.