ब्रेकिंग
Vaibhav Suryavanshi: बुमराह को छक्का जड़ने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अपना 'लकी बैट' करेंगे गिफ्ट... Mahavatar Movie Casting: विकी कौशल की 'महावतार' में हुई इस 800 करोड़ी एक्ट्रेस की एंट्री, दीपिका पाद... Melania Trump on Epstein: जेफरी एपस्टीन से संबंधों के आरोपों पर मेलानिया ट्रंप का बड़ा बयान, 'झूठे क... Income Tax Saving Tips: क्या होता है चिल्ड्रन अलाउंस? बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर ऐसे बचाएं अप... BSNL vs Jio vs Airtel: इस मामले में जियो-एयरटेल से आगे निकला BSNL, बना देश का नंबर 1 टेलीकॉम ऑपरेटर! Shukrawar Ke Niyam: शुक्रवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, मां लक्ष्मी हो जाएंगी नाराज; घर में आएगी... Amarnath Yatra Packing List: अमरनाथ यात्रा पर जाने से पहले बैग में जरूर रख लें ये चीजें, वरना हो सकत... CAPF Law Update: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी, अब बदल जाएंगे भर्ती और सेव... Noida News: हादसा या हत्या? एमिटी छात्र हर्षित की संदिग्ध मौत पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंकाया, जां... Nainital News: नैनीताल में 9वीं के छात्र का शारीरिक शोषण, भाभी और देवर के दोस्त ने अश्लील वीडियो बना...

Nari Shakti Vandan: 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र, OBC आरक्षण की मांग ने बढ़ाई सियासी तपिश; आर-पार के मूड में विपक्ष

नारी शक्ति वंदन कानून लेकर पहले ही विपक्ष सीटें बढ़ाने के मामले में दक्षिण भारत को उत्तर भारत के मामले में नुकसान का मुद्दा उठाकर नाराजगी जाहिर कर चुका है. अब आरक्षण में पिछड़े वर्ग की महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा उठाकर वो सरकार के लिए नया सिरदर्द पैदा करता दिख रहा है. दरअसल, इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के कई दल राहुल गांधी पर दबाव बना रहे हैं कि वे सिर्फ ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के मुद्दे को उठाने तक सीमित न रहें, बल्कि ओबीसी आरक्षण की मांग को भी उतनी ही मजबूती से संसद और जनता के सामने रखें. उनका मानना है कि सामाजिक न्याय की राजनीति को और स्पष्ट तथा प्रभावी बनाने की जरूरत है.

खुद कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने भी यही मांग की है. ऐसे में राहुल गांधी के सामने एक राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है. यदि वे इस मांग का समर्थन करते हैं, तो उन्हें इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना होगा. वहीं, अगर वे इससे दूरी बनाते हैं, तो गठबंधन के भीतर असहमति बढ़ सकती है, जिससे विपक्ष की एकजुटता पर असर पड़ सकता है. वैसे खुद भी राहुल गांधी ओबीसी के मुद्दे को हाल में लगातार मजबूती से उठाते आए हैं.

सरकार को दो तिहाई समर्थन चाहिए

वहीं, राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो 2023 में लोकसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल था, जिससे वह अपने कई विधेयकों को आसानी से पारित करा सकी. लेकिन अब परिस्थिति थोड़ी अलग दिखाई दे रही है. अब इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए सरकार को दो तिहाई यानी 364 सांसदों का समर्थन चाहिए, जो बिना विपक्ष के सहयोग के जुटाना मुश्किल दिखाई दे रहा है.

विशेष सत्र में हंगामे के आसार

सरकार को जहां विपक्ष का भरोसा जीतना होगा, वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी एकजुटता और रणनीति को मजबूत करने की कोशिश करेगा. कुल मिलाकर 16 अप्रैल से फिर तीन दिन के लिए शुरू होने वाले विशेष सत्र में यह एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है. इस पर हंगामे के आसार हैं.