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पंचकूला: भले ही इन दिनों मौसम लगातार करवट ले रहा हो. लेकिन इस साल गर्मी के सीजन ने निर्धारित समय से कुछ पहले दस्तक दे दी है. नतीजतन, आगामी दिनों में जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, हर उम्र वर्ग के लोगों के लिए कुछ शारीरिक चुनौतियां भी खड़ी होंगी. बढ़ती गर्मी से बचाव रखते हुए अच्छा स्वास्थ्य कैसे पाएं, खान-पान में क्या बदलाव करें और क्या सावधानियां जरूरी हैं. यह जानने के लिए ईटीवी भारत ने पंचकूला सिविल अस्पताल के डॉक्टर गिरीश बंसल से बातचीत की.

12 वर्ष तक के बच्चों को धूप से बचाएं: डॉ. गिरीश बंसल ने ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान कहा कि, “भले ही बेमौसम बरसात से मौसम हल्का ठंडा हुआ है, लेकिन इससे सर्दी-जुकाम और बुखार का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, गर्मी कुछ पहले जरूर आ गई हैं. ऐसे में आगामी दिनों में तापमान अधिक बढ़ेगा. नतीजतन 12 वर्ष तक के बच्चों को धूप और तपिश के पिक टाइम में बचाना जरूरी रहता है. इस उम्र के बच्चों को सुबह 11 से शाम 5 बजे तक धूप से बचाए रखना जरूरी है.”

खान-पान में लिक्विड डाइट बढ़ाएं: खान-पान को लेकर डॉ गिरीश बंसल ने कहा कि, “खान-पान में भी कुछ बदलाव करना जरूरी है, जैसे की शुद्ध पेयजल (प्यूरीफाइड वॉटर) अधिक लें. साथ ही नींबू पानी और ओआरएस जरूर लें. इसके अलावा बच्चों की डाइट में फल (फ्रूट्स) की मात्रा बढ़ाना भी जरूरी है.”

धूप में टोपी और सनग्लास पहनें: डॉक्टर बंसल ने आगे ने कहा कि, “12 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को स्कूल या प्रैक्टिस के दौरान खेलना होता है, जिसके चलते उन्हें धूप से बचाव के लिए सिर पर टोपी पहननी चाहिए. साथ ही अपने साथ पानी की बोतल रखें, ताकि डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए थोड़ा-थोड़ा पानी पिया जा सके. शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन को बनाए रखना और पानी की कमी को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण है. यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, पोषक तत्वों को पहुंचाने और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए जरूरी है.”

गर्भवती महिलाएं सावधानी रखें: गर्भवती महिलाओं के लिए डॉ. गिरीश बंसल ने बताया कि, “गर्भवती महिलाएं अपने और गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए और हाइड्रेट रहने के लिए अधिक पानी पीएं. लस्सी और ओआरएस का सेवन अधिक करें. यदि मजबूरन धूप में निकलना पड़ रहा है तो ऐसे में सिर पर टोपी पहनें और सनग्लास का इस्तेमाल जरूर करें. साथ ही लू से अपना बचाव करें और कहीं खुले में कुछ देर रूकना जरूरी हो तो पेड़ की छांव का सहारा लें. हीटवेव/हिटस्ट्रोक से बचाव रखना अत्यधिक जरूरी है.”

गर्मी में स्किन एलर्जी से बचाव को सावधानी: डॉ. गिरीश बंसल ने आगे बताया कि, “जिन लोगों को गर्मियों में स्किन एलर्जी का खतरा अधिक रहता है, उन्हें अपने चेहरे और बाजू कपड़े (स्काफ) से ढकनें चाहिए. साइकिल/स्कूटर या फिर फोर व्हीलर में भी अधिक गर्मी में ग्लव्स पहनना जरूरी है. साथ ही अधिक एसपीएफ वाले सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल जरूर करें, जिससे हीटबर्न या सनबर्न की खतरा काफी कम हो जाता है.”

बच्चों की परफेक्ट डाइट: बच्चों की डाइट को लेकर डॉ. गिरीश बंसल ने कहा कि, “अधिकांश बच्चों में हेल्दी डाइट न लेने की समस्या देखी जाती है. ऐसे में परिवारों को उनकी डाइट में फाइबर, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट संतुलित मात्रा में शामिल करें. इसके अलावा गर्मियों में नींबू पानी, लस्सी और जूस अधिक पिलाएं. यदि समय की कमी होने पर यह सब कुछ तैयार करना संभव न भी हो तो ओआरएस को दो लीटर पानी की बोतल में घोलकर पिलाते रहें.”

मेडिकल टेस्ट जरूर कराएं: बड़े-बुजुर्गों में थकान और नींद की समस्या अधिक देखी जाती है, ऐसे में डॉक्टर गिरीश बंसल ने सलाह दी कि लोगों को साल में कम से कम दो बार अपने मेडिकल टेस्ट जरूर करवाने चाहिएं, ताकि रिपोर्ट्स के आधार पर डॉक्टर अच्छे स्वास्थ्य के लिए परामर्श दे सकें. उन्होंने कहा कि शुगर, थायराइड का टेस्ट करवाना काफी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ऐसा होने पर अधिक कमजोरी बनती है, जिससे रोजाना की दिनचर्या में शरीर साथ नहीं देता. उन्होंने कहा कि जब कभी भी सीजन में बदलाव हो, सर्दियां या गर्मियां शुरू हों तो पहले अपने मेडिकल टेस्ट जरूर करवाने चाहिएं, ताकि शरीर फिट रहे.

डिहाइड्रेशन को दूर करना इसलिए जरूरी: पानी की कमी से शारीरिक और मानसिक कार्यक्षमता कम हो जाती है. डिहाइड्रेशन से शरीर में नमक और शुगर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और बेहोशी हो सकती है. पानी का सेवन किडनी के माध्यम से अपशिष्ट को बाहर निकालने के लिए अनिवार्य है. इसके अलावा अत्यधिक पसीने या गर्मी में पानी की कमी से चक्कर आ सकते हैं या हीट स्ट्रोक हो सकता है.

डिहाइड्रेशन के कारण और लक्षण:

कारण: पर्याप्त पानी न पीना, दस्त, उल्टी या तेज बुखार

लक्षण: मुंह सूखना, तेज प्यास लगना, गहरे रंग का पेशाब, थकान और चक्कर आना. नतीजतन भरपूर मात्रा में पानी पीएं. पानी के अलावा खीरा, तरबूज, नींबू पानी, नारियल पानी और लस्सी जैसे तरल पदार्थों का सेवन करें. जरूरी नहीं कि प्यास लगने पर ही पानी पीएं, इसलिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें.