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LPG Crisis Impact: युद्ध की मार अब रसोई पर! गैस संकट के बीच लकड़ी और कोयले की डिमांड में 50% का भारी उछाल

फरीदाबाद: खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है. खासतौर पर रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. गैस सिलेंडर की कमी और महंगाई के चलते लोग अब वैकल्पिक ईंधन की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि लकड़ी और कोयले की मांग में अचानक जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है.

मांग में 50 फीसद तक उछाल: पहले जहां लकड़ी और कोयले का कारोबार सामान्य स्तर पर चल रहा था. वहीं, अब इसमें तेजी आ गई है. शुरुआती दौर में इस व्यापार में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, लेकिन अब यह बढ़ोतरी 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. मांग बढ़ने के साथ-साथ इनके दामों में भी इजाफा देखने को मिल रहा है, जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में यह बाजार और गर्म हो सकता है.

जानें क्या बोले लकड़ी व्यापारी: लकड़ी और कोयले के व्यापारी अरुण ने ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान मौजूदा स्थिति को लेकर कहा कि, “शुरुआत में बिक्री में थोड़ी वृद्धि हुई थी और यह करीब 20 प्रतिशत तक पहुंची थी, लेकिन अब यह बढ़कर 50 प्रतिशत हो गई है. होटल और ढाबे वाले तो पहले से ही इसका इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब मध्यम वर्ग के परिवार भी बड़ी संख्या में लकड़ी और कोयला खरीद रहे हैं. कीमतों में भी हल्की बढ़ोतरी हुई है. जो लकड़ी पहले 15 रुपये प्रति किलो थी, वह अब 16 रुपये हो गई है, और कोयला 40 रुपये से बढ़कर 43 रुपये प्रति किलो बिक रहा है.”

आम लोगों की बढ़ी परेशानी: गैस की बढ़ती कीमतों और सिलेंडर की कमी ने आम लोगों को मुश्किल में डाल दिया है. लकड़ी खरीदने आए एक ग्राहक विपिन ने ईटीवी भारत को बताया कि, “पहले हम गैस पर खाना बनाते थे, लेकिन अब सिलेंडर मिल नहीं रहा है. अगर मिलता भी है तो ब्लैक में 4000 रुपये तक का पड़ता है. ऐसे में हम जैसे मध्यम वर्ग के लोग इसे खरीद नहीं सकते, इसलिए अब लकड़ी पर ही खाना बना रहे हैं.”

होटल और ढाबों पर भी असर: इस बदलाव का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल और ढाबों पर भी साफ नजर आ रहा है. कई छोटे होटल और ढाबा संचालक गैस की जगह अब लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि लागत को कम किया जा सके. इससे इन ईंधनों की मांग में और तेजी आई है.

ईंधनों की ओर बढ़ रहे लोग: कुल मिलाकर खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध और बढ़ती महंगाई ने आम आदमी को पारंपरिक ईंधनों की ओर लौटने के लिए मजबूर कर दिया है. जिस तरह से लकड़ी और कोयले की मांग लगातार बढ़ रही है, उससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में इनके दामों में और वृद्धि हो सकती है.