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उज्जैन से खुलेगा अंतरिक्ष का रहस्य! डोंगला वेधशाला पहुंचे देश-विदेश के वैज्ञानिक, सीएम मोहन यादव भी हुए शामिल

उज्जैन: अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम का शनिवार 4 अप्रैल को दूसरा दिन रहा. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इस कार्यक्रम में शामिल हुए. 3 दिवसीय इस खास आयोजन को मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा संयुक्त रूप से उज्जैन के तारामंडल में आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम के दूसरे दिन देश और दुनिया के वैज्ञानिक और शोधार्थी वेधशाला पहुंचे. जहां वैज्ञानिकों ने भारत के अंतरिक्ष मिशनों की जानकारी साझा की.

सीएम मोहन यादव पहुंचे वेधशाला

उज्जैन से लगभग 32 किलोमीटर दूर डोंगला स्थित वेधशाला में द मास्टर ऑफ टाइम कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कार्यक्रम के दूसरे दिन भारत में खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान का वर्तमान और भविष्य नामक एक सत्र रखा गया. जहां देश और दुनियाभर से वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शामिल हुए.

कई प्रमुख वैज्ञानिक कार्यक्रम में हुए शामिल

वेधशाला में आयोजित सत्र में राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (आरआरकैट) के पूर्व निदेशक डॉ शंकर नाखे और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी अंतरिक्ष विभाग अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज सहित कई वैज्ञानिक प्रमुख रूप से शामिल हुए.

सीएम मोहन यादव ने चंद्रयान-3 की सराहना की

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत जानकारियों को अत्यंत रोचक बताते हुए भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों पर गौरव व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 जैसी उपलब्धियां देश के युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं.”

‘चंद्रयान-3 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की महत्वपूर्ण भूमिका’

फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने चंद्रयान-3 मिशन की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया, “विक्रम लैंडर की सफल सॉफ्ट लैंडिंग भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि रही. इसके साथ भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बना. इस मिशन की सफलता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन किए और इस लैंडिंग स्थल को शिव शक्ति पॉइंट नाम दिया गया. चंद्रयान-4 (लूनर सैंपल रिटर्न मिशन), चंद्रयान-5 भारत-जापान संयुक्त मिशन, वीनस ऑर्बिटर मिशन और मंगल लैंडर मिशन और वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की भारत की महत्वाकांक्षी योजनाओं की भी जानकारी दी.”

‘अंतरिक्ष की गतिविधियों का अध्ययन महत्वपूर्ण’

स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, तिरुवनंतपुरम के निदेशक डॉ. तरुण पंत ने आयनोस्फियर एवं ऊपरी वायुमंडल की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया, “अंतरिक्ष की गतिविधियां पृथ्वी के वातावरण और जलवायु को प्रभावित करती हैं. इनका अध्ययन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.”

अंतरिक्ष तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत आधार

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने कहा, “अंतरिक्ष तकनीक आज विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है. बाल्यकाल में एक सैटेलाइट प्रक्षेपण की खबर ने मुझे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा दी. आधुनिक समय में रक्षा तकनीक तेजी से बदल रही है और पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियां विकसित हो रही हैं. रक्षा क्षेत्र में निजी स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.”

विकसित भारत के लिए स्पेस इकोनॉमी की बढ़ती भूमिका

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने स्पेस इकोनॉमी, निजी क्षेत्र की भागीदारी और युवाओं के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते अवसरों पर चर्चा की. अंतरिक्ष तकनीक न केवल वैज्ञानिक प्रगति बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है.

‘विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय समय की आवश्यकता’

राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (आरआरकैट) के पूर्व निदेशक डॉ. शंकर नाखे ने कहा, “विज्ञान और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके समन्वय से मानव समाज का संतुलित विकास संभव है. उज्जैन नगरी महाकालेश्वर मंदिर और कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण प्राचीन काल से ही काल गणना और खगोलीय अध्ययन का केंद्र रही है. जो इस सम्मेलन की प्रासंगिकता को और अधिक सार्थक बनाता है.”

डॉ. नाखे ने आगे बताया, “आधुनिक विज्ञान का उपयोग चिकित्सा, ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान सहित अनेक क्षेत्रों में हो रहा है. विज्ञान और अध्यात्म के समन्वित दृष्टिकोण से ही एक जागरूक, संतुलित और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है.”