महाकाल की शरण में ‘दिग्गज’! केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और उमेश यादव ने टेका मत्था; भस्म आरती में हुए शामिल
उज्जैन: महाकाल धाम बनने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर दिन मंदिर पहुंच रहे हैं. आम श्रद्धालुओं के साथ ही बड़ी-बड़ी हस्तियां भी महाकाल के दर पर माथा टेकने पहुंच रहे हैं. इसी क्रम में शुक्रवार अल सुबह की भस्म आरती में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भारतीय क्रिकेटर उमेश यादव पहुंचे. जहां उन्होंने दर्शन कर बाबा का आशीर्वाद लिया. वहीं मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल भी परिवार के साथ महाकाल मंदिर पहुंचे.
केंद्रीय मंत्री पहुंचे महाकाल मंदिर
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उज्जैन में आयोजित महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम्स कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं. केंद्रीय मंत्री और क्रिकेटर दोनों ने 2 घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल की आरती दर्शन का लाभ लिथा. साथ ही चौखट से माथा टेक कर आशीर्वाद लिया. मंदिर परिसर में तस्वीरें क्लिक करवाई और अपने दर्शन के अनुभव को भी साझा किया. मंदिर समिति की और से सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया ने दोनों का स्वागत सत्कार किया.
शिक्षा मंत्री बोले ऊर्जा की हुई अनुभूति
दर्शन के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने अनुभवों को मीडिया से साझा किया. जहां उन्होंने कि आज वैशाख कृष्ण पक्ष की प्रथमा तिथि है. वैशाख महीना भगवान को शीतलता प्रदान करने का होता है. मैं भाग्यशाली हूं भगवान के दर्शन लाभ मिले. आध्यात्मिक ऊर्जा कि अनुभूति होती है. देश ही नहीं विश्व में शांति बनी रहे ऐसी बाबा से मंगलकामना की है.”
क्रिकेटर उमेश यादव ने लिया आशीर्वाद
भारतीय क्रिकेटर उमेश यादव ने कहा “भगवान का बुलावा होता है, तब ही आना होता है. मैं कई बार आया हूं, ये मेरा सौभाग्य है. बाबा से आने वाले समय के लिए आशीर्वाद मांगा है. सभी पर भगवान का कल्याण हो, ऐसी मंगलकामना है.”
वहीं मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी पत्नी के साथ बाबा महाकाल मंदिर पहुंचे. जहां उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर शिव साधना की और चौखट से माथा टेक कर आशीर्वाद लिया.
वैशाख व ज्येष्ठ माह में महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का गलंतिका से सतत जलाभिषेक शीतलता के लिए किया जाता है. परंपरानुसार 03 अप्रैल (वैशाख कृष्ण प्रतिपदा) से 29 जून (ज्येष्ठ पूर्णिमा) तक भगवान श्री महाकालेश्वर पर 11 मिट्टी के कलशों के माध्यम से सतत जलधारा के लिए गलंतिका लगाई गई है. इन कलशों में गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, सरयू, क्षिप्रा एवं गण्डकी जैसी पवित्र नदियों का स्मरण, आव्हान एवं ध्यान मंत्रों के साथ जल स्थापित किया गया है.