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Tribal Welfare News: आदिम जनजातियों को टूटी झोपड़ियों से मिलेगी आजादी, 792 परिवारों के लिए बन रहे पक्के आवास

लातेहार: समाज के सबसे निचले पायदान पर जीवन यापन करने वाले आदिम जनजातियों के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान वरदान साबित हो रहा है. प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आदिम जनजातियों की बदहाली को खत्म करने के लिए जो अभियान चला है, वह अभियान अब धीरे-धीरे धरातल पर भी उतरने लगा है. इसी अभियान के तहत जिले के सभी आदिम जनजातियों को पक्का मकान देने की योजना अंतिम चरण में है. इसमें 792 आदिम जनजातियों के लिए पीएम आवास की स्वीकृति भी दे दी गई है और उसका निर्माण भी आरंभ हो गया है.

दरअसल, लातेहार जिले में लगभग 3963 आदिम जनजाति परिवार निवास करते हैं. सरकार इन्हें बिरसा आवास उपलब्ध कराती थी. लेकिन जिले में कई ऐसे आदिम जनजाति परिवार थे, जिन्हें आवास की सुविधा नहीं मिल पाई थी. प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत अब उन आदिम जनजातियों के विकास के लिए कार्य योजना तैयार की गई और सर्वे किया गया. इसके बाद सभी जरूरतमंद आदिम जनजातियों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति प्रदान की गई. संभावना है कि आने वाले कुछ दिनों में आदिम जनजातियों के सभी परिवार पक्के आवास में रहने लगेंगे.

बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से भी किया जा रहा है परिपूर्ण

इस संबंध में लातेहार समेकित आदिवासी विकास परिषद (आईटीडीए) के निदेशक प्रवीण कुमार गगरई ने जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत लक्ष्य रखा गया है कि आदिम जनजातियों को सभी प्रकार की सुविधाओं से परिपूर्ण किया जाएगा. जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके. उन्होंने कहा आदिम जनजातियों की संख्या जहां भी है, उस इलाके में सड़क, बिजली, पानी के अलावे शिक्षा और स्वास्थ्य की भी बेहतर व्यवस्था की जा रही है. आईटीडीए ने कहा कि सभी आदमी जनजातियों को राशन कार्ड से भी परिपूर्ण कर लिया गया है. डाकिया योजना के तहत इन्हें घर तक राशन पहुंचाया जाता है.

लातेहार में रहते हैं ये आदिम जनजाति के लोग

लातेहार जिले में मुख्य रूप से बिरजिया, बिरहोर, परहिया, असुर-आगरिया, सबर, कोरबा आदि आदमी जनजाति के लोग रहते हैं. इनमें सबसे अधिक संख्या परहिया आदमी जनजाति की है. आदिम जनजातियों का अधिकांश गांव सुदूर इलाके में ही बसा हुआ रहता है. लातेहार और मनिका प्रखंड के कुछ इलाकों में बिरहोर जनजाति के लोग निवास करते हैं. जबकि महुआडांड़ प्रखंड के इलाके में बिरजिया और कोरबा आदमी जनजाति निवास करते हैं. असुर-अगरिया और परहिया आदिम जनजाति समुदाय के लोग लगभग सभी प्रखंडों में हैं.