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Eid 2026: बोहरा समाज ने आज मनाई ईद! मस्जिदों में उमड़ी भीड़, देश की अमन-चैन के लिए मांगी दुआ; जानें क्यों सबसे पहले त्योहार मनाता है ये समाज?

भोपाल: राजधानी भोपाल में बोहरा समाज ने ईद का पर्व सादगी और धार्मिक आस्था के साथ मनाया. सुबह से ही अलग-अलग मस्जिदों और मरकजों में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ जुटी. नमाज के दौरान देश और दुनिया में अमन-शांति और खुशहाली की दुआ की गई. बूढ़े, जवान, बच्चों सहित बोहरा समाज की महिलाओं ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी.

इन मस्जिदों में हुई नमाज अदा
देशभर में बोहरा समाज ने ईद उल फित्र को सादगी के साथ मनाया. सुबह सबसे पहले बोहरा समाज के लोगों ने ईद की नमाज अदा की. नमाज नूर महल मरकज, अलीगंज मस्जिद, करोंद स्थित बुरहानी मस्जिद, सोफिया कॉलेज परिसर की बद्री मस्जिद, कोहफिजा मरकज, कब्रस्तान स्थित अहमदी मस्जिद और मालीपुरा की हुसैनी मस्जिद में अदा की गई. सभी स्थानों पर समाजजनों ने अनुशासन और सादगी के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन किया.

सादगी और सौहार्द के साथ मनाया त्योहार
मीडिया इंचार्ज इब्राहिम अली दाऊद ने बताया कि, ”अलीगंज मस्जिद में जनाब इब्दे मदियान की मौजूदगी में नमाज अदा की गई. इस दौरान जूजर भाई साहब जाकवी और मुफद्दल भाईसाहब की देखरेख में भी शहर के अन्य इलाकों में लोगों ने नमाज अदा की.” नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी और समाज में भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया. पूरे आयोजन में सादगी पर विशेष जोर रहा और समाजजनों ने आपसी सौहार्द के साथ त्योहार मनाया.

बोहरा समाज की ईद पहले क्यों?
दाऊदी बोहरा समाज ईद-उल-फितर आमतौर पर भारत के अन्य मुस्लिम समुदायों से एक दिन पहले मनाता है. क्योंकि वे पारंपरिक चांद देखने के बजाय ‘इस्लामिक कैलेंडर’ (मिसाक-ए-हिजरी) के अनुसार पहले से तय तारीखों का पालन करते हैं. यह समुदाय सऊदी अरब की तरह ही 29वें रोजे को चांद की पुष्टि मानकर 30वें दिन ईद मनाता है. जिससे वे अधिकांश समय सऊदी अरब के साथ या अन्य लोगों से एक दिन पहले ईद मनाते हैं.

बोहरा समाज की ईद में अंतर
बोहरा समुदाय का कैलेंडर वर्ष भर की तारीखें पहले से ही तय रखता है, जिससे रोजों की संख्या और ईद का दिन पहले से ही पता होता है. बोहरा समाज के लोग आमतौर पर ईद के दिन सुबह-सबसे पहले फज्र की नमाज पढ़ते हैं, जिसके बाद विशेष ईद की नमाज (नमाज-ए-दुगाना) अदा की जाती है. सामूहिक नमाज के बाद वे एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारकबाद देते हैं और सामुदायिक स्तर पर जश्न मनाते हैं. इस दौरान बच्चों को ईदी देने का भी रिवाज है.