ब्रेकिंग
अविश्वास प्रस्ताव से पहले PM मोदी का विपक्ष पर बड़ा प्रहार! बोले- 'ओम बिरला अहंकारी उत्पाती छात्रों ... Chitrakoot School News: पढ़ाई की जगह छात्राओं से मसाज कराने वाली प्रधानाध्यापिका निलंबित, जांच के बा... ईरान-इजराइल जंग से नहीं महंगी होगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें! भारत सरकार का बड़ा बयान- 'हमारे पास है ते... अन्ना हजारे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी! मिडिल ईस्ट की जंग देख भावुक हुए अन्ना, बोले- 'शांति के लिए पह... अमित शाह की हुंकार! 'केदारनाथ से कन्याकुमारी तक चुन-चुनकर बाहर होंगे घुसपैठिये', जन-जन की सरकार समार... Purnia Crime News: पूर्णिया में बुजुर्ग महिला से दरिंदगी, हत्या के बाद शव से रेप और फिर पेड़ से लटका... IPS Anshika Verma Wedding: आईपीएस अंशिका वर्मा और केके बिश्नोई जल्द बंधेंगे शादी के बंधन में, सोशल म... UPSC Result में 'हमशक्ल' नाम का खेल! 301वीं रैंक पर दो आकांक्षा सिंह का दावा, जानें कौन है असली अफसर... जींद में रोंगटे खड़े कर देने वाला कांड: रंग फैक्ट्री में लगी आग, बाहर से ताला लगा होने के कारण 4 महि... Bihar Politics: निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर उपेंद्र कुशवाहा का रुख साफ, बोले- JDU के अस्ति...

Ram Rahim Acquitted: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में राम रहीम बरी, हाईकोर्ट ने बरकरार रखी अन्य 3 दोषियों की सजा

बहुचर्चित छत्रपति हत्याकांड मामले में डेरा मुखी को बड़ी राहत मिली है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आज सुबह सीबीआई अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए डेरा मुखी को इस मामले से बरी कर दिया है। हालांकि अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए अन्य तीन आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।

हाईकोर्ट ने यह फैसला आरोपियों द्वारा सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा मुखी के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वहीं, अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उनकी दोषसिद्धि और सजा को कायम रखा गया है।

साल 2002 में गोली मारकर की थी छत्रपति की हत्या 

मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसने अपने समय में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था, जिसके बाद वर्ष 2002 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी और मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद मामले में डेरा मुखी सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से विस्तृत बहस की गई। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि डेरा मुखी के खिलाफ अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश में संलिप्तता को संदेह से परे साबित किया जा सके। वहीं कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के खिलाफ अदालत ने पाया कि उनके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य और गवाहियों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित होती है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया।