सावधान! शहर में कचरे का ‘पहाड़’ बढ़ा रहा बीमारियों का खतरा, हजारों लोग बेहाल; प्रशासन की सुस्ती का कौन है जिम्मेदार?
लोहरदगा: शहर में कुल 23 वार्ड हैं. यहां से हर दिन कई टन कचरा निकलता है. लोगों के घरों, दुकानों, सड़कों और गलियों से निकलने वाला कचरा शहर से बस कुछ ही दूरी पर लोहरदगा-किस्को मुख्य पथ में नगर परिषद के अस्थाई कचरा डंपिंग यार्ड में फेंका जाता है. कई बार कचरा डंपिंग यार्ड के लिए जमीन की खरीद हुई, फिर भी योजना फाइलों में ही दब कर रह गई. कुल 138 साल पुराने लोहरदगा नगर परिषद के लिए आज तक स्थाई कचरा डंपिंग यार्ड का निर्माण नहीं हो पाया है. कचरा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. कचरे का ढेर बढ़ रहा है और उसके साथ ही खतरा भी बढ़ता जा रहा है. सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि आखिर इससे संबंधित योजना कहां पर फंस रही है और यह योजना क्यों पूरा नहीं हो पा रही.
करोड़ों की खरीदी गई जमीन परंतु नहीं निकला परिणाम
हर दिन निकलने वाले कचरे को निस्तारित करने के लिए कोई ठोस योजना लोहरदगा नगर परिषद के पास नहीं है. फिलहाल, नगर परिषद ने लोहरदगा-किस्को मुख्य सड़क पर ओयना के पास एक खुली जगह लीज पर ली है और वहां कचरा डंपिंग यार्ड बनाया है. जहां पर शहर से निकलने वाले कचरे को डंप किया जाता है. हालत ऐसी है कि यहां से गुजरने पर दुर्गंध से बुरा हाल हो जाता है. कचरे में लगी आग आसपास के वातावरण को खराब कर रही है. लोग परेशान हैं. कई बार विरोध भी कर चुके हैं, पर इसका कोई भी समाधान नहीं निकल पाया है.
विरोध के कारण काम नहीं हो पाया
ऐसा नहीं है कि नगर परिषद ने कचरा डंपिंग यार्ड को लेकर कोई पहल नहीं की थी. 10 साल पहले नगर परिषद की ओर से सबसे पहले करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन शहर से सटे जुरिया के इलाके में खरीदी गई थी. लेकिन यहां पर विरोध की वजह से योजना पर काम नहीं हो पाया. इसके बाद नगर परिषद की ओर से हाल के समय में साढ़े सात एकड़ जमीन सेन्हा इलाके में खरीदी गई है. यहां पर भी अभी तक योजना को गति नहीं मिल पाई है.
नगर परिषद प्रशासक मुक्ति किंडो का कहना है कि संबंधित विभाग से अभी तक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं मिला है. जिसकी वजह से योजना को गति नहीं मिल पा रही है. जैसे ही संबंधित कागजात मिल जाएंगे, वैसे ही आगे का काम शुरू होगा. इसके लिए डीपीआर बनाने वाली कंपनी को भी निर्देश दिए गए हैं.
बढ़ते कचरे की समस्या से लोग परेशान
खैर बात जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि नगर परिषद की सफाई से जुड़े हुए अधिकारी बताते हैं कि हर दिन शहर से लगभग 20 टन कचरा निकलता है. यह कचरा बेहद खतरनाक है. इसमें प्लास्टिक और दूसरे खतरनाक सामान भी होते हैं. यदि इन्हें सही तरीके से निस्तारित नहीं किया गया तो यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. नगर परिषद की ठोस रणनीति का अभाव योजना को जमीन पर उतरने से रोक रहा है. शहर में बढ़ते कचरे की समस्या से लोग भी परेशान हैं.
शहर में कचरा लगातार बढ़ रहा है
लोहरदगा शहर तेजी से फैल रहा है. शहर की आबादी भी बढ़ रही है और उसके साथ ही यहां पर हर दिन निकलने वाला कचरा भी बढ़ रहा है. समस्या गंभीर है, इसके बाद भी कचरा निस्तारण को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. हर दिन निकलने वाला कचरा खुले स्थान में फेंका जाता है.