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बड़ी खबर: बिहार के IG सुनील नायक को आंध्र पुलिस ने पटना में किया गिरफ्तार! पूर्व सांसद को टॉर्चर करने का आरोप, कोर्ट में खुला ये राज

बिहार अग्निशमन विभाग के आईजी एम. सुनील नायक को आंध्र प्रदेश पुलिस ने पटना से गिरफ्तार किया है. इनकी गिरफ्तारी वर्ष 2021 के कथित हिरासत प्रताड़ना मामले में हुई है. प्रकाशम जिला पुलिस गिरफ्तारी के बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर आंध्र प्रदेश ले जाने की तैयारी में है.

सुनील कुमार नायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 के तहत मामला दर्ज है. यह मामला आंध्र प्रदेश के नरसापुरम लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू से जुड़ा हुआ है.

2021 में लगे गंभीर आरोप

वर्ष 2021 में जब सुनील कुमार नायक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे, तब वे अपने स्टेट कैडर आंध्र प्रदेश में सीआईडी में तैनात थे. इसी दौरान उनके निर्देश पर आंध्र प्रदेश के नरसापुरम लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू को सीआईडी की टीम ने एक गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया था.

के. रघुराम कृष्णा राजू ने सुनील कुमार नायक पर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था कि गिरफ्तारी के दौरान सीआईडी टीम द्वारा उनके साथ गंभीर मारपीट की गई. इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर सुनील कुमार नायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था.

2019 में गए थे प्रतिनियुक्ति पर

सुनील नायक वर्ष 2019 में आंध्र प्रदेश प्रतिनियुक्ति पर गए थे और करीब तीन वर्षों तक वहां तैनात रहे. वर्ष 2024 में तेलुगु देशम पार्टी की सरकार बनने के बाद वे अपने मूल कैडर बिहार लौट आए.

बेल रद्द होने के बाद हुई गिरफ्तारी

इसी मामले में अब उनकी बेल रद्द हो गई है और आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम उन्हें गिरफ्तार करने पटना पहुंची. गिरफ्तारी के बाद सुनील कुमार नायक को आंध्र प्रदेश पुलिस कोर्ट में पेश करेगी.पेशी के दौरान पुलिस टीम कोर्ट से उनकी ट्रांजिट रिमांड मांगेगी.

ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस सुनील कुमार नायक को अपने साथ आंध्र प्रदेश ले जाएगी. के. रघुराम कृष्णा राजू वर्तमान में आंध्र प्रदेश विधानसभा में डिप्टी स्पीकर हैं.

सुनील नायक 2005 बैच के IPS

सुनील कुमार नायक बिहार कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. वे मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ था. उन्होंने 12 दिसंबर 2005 को आईपीएस सेवा जॉइन की और अपने करियर की शुरुआत बिहार में की. वे कई जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर भी तैनात रहे.

वर्ष 2019 में व्यक्तिगत कारणों के आधार पर उन्हें इंटर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश भेजा गया. यह प्रतिनियुक्ति तीन वर्षों के लिए थी, जो 7 जनवरी 2020 से प्रभावी हुई.

आंध्र प्रदेश में वे सीआईडी में डीआईजी के पद पर तैनात रहे. इस दौरान उन्होंने कई संवेदनशील मामलों की जांच की निगरानी की. वर्ष 2021 में एक कथित हिरासत प्रताड़ना (कस्टोडियल टॉर्चर) का मामला चर्चा में आया, जो पूर्व सांसद रघुरामा कृष्णा राजू से जुड़ा था. आरोप था कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट और प्रताड़ना की गई. उस समय सीआईडी की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आए थे.

प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद वर्ष 2023 में वे वापस बिहार लौट आए. फरवरी 2026 तक वे बिहार फायर सर्विसेज में आईजी सह निदेशक-कम-स्टेट फायर ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे. इस पद पर वे अग्निशमन सेवाओं के संचालन, आधुनिकीकरण, संसाधन प्रबंधन और प्रशिक्षण से जुड़े कार्यों की निगरानी कर रहे थे. हाल के वर्षों में बिहार फायर सर्विसेज के बुनियादी ढांचे के विस्तार और उपकरणों के उन्नयन का काम भी चल रहा था, जिसकी मॉनिटरिंग उनके स्तर से की जा रही थी.