जांजगीर चांपा: तीन दिवसीय जाज्वल्यदेव एग्रीटेक और लोक महोत्सव का रंगारंग समापन सोमवार को हुआ. महोत्सव के समापन अवसर पर प्रदेश के कौशल विकास तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने शिरकत की. कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक कलाकार आरु साहू और सारेगामापा विनर इशिका विश्वकर्मा ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया.
किसानों के लिए मेला
जांजगीर चांपा क़ृषि प्रधान जिला के रूप मे जाना जाता है. यहां के 90 प्रतिशत किसानों को खेती के लिए नहर से पानी मिलता है. जिसकी वजह से यहां धान के साथ अन्य फसलों का भी उत्पादन अच्छे से होता है. जिले की खेती किसानी परंपरा को वैज्ञानिक पद्धति और आधुनिक पद्धति से जोड़ने के लिए 2 दशक पहले कृषि मेला शुरू किया गया. अब यह मेला छत्तीसगढ़ ही नहीं अन्य प्रांतों मे भी अपनी पहचान बना चुका है. यहीं वजह है कि हर साल यहां जाज्वल्यदेव एग्रीटेक और लोक महोत्सव का आयोजन होता है.
जाज्वल्यदेव लोक कला महोत्सव में मंत्री
हाई स्कूल मैदान में आयोजित जाज्वल्यदेव लोक कला एवं एग्रीटेक क़ृषि मेला के समापन अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जांजगीर पहुंचे. उन्होंने जाज्वल्यदेव स्मारिका का विमोचन किया और इस महोत्सव को क़ृषि और कला का अद्भुत संगम बताया.उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार की नीति बताये हुए अंतिम व्यक्ति के विकास के लिए सोचने वाली सरकार बताया.
इशिका विश्वकर्मा और आरु साहू की प्रस्तुति
महोत्सव के समापन अवसर पर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के दो कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी. सारेगामापा विनर इशिका विश्वकर्मा ने पहली बार जांजगीर में अपनी प्रस्तुति दी. इशिता ने सत्यम शिवम सुंदरम गाना से कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एक से बढ़ कर एक नए पुराने फ़िल्मी गीतों की प्रस्तुति दी. वहीं छत्तीसगढ़ की लोक गायिका आरु साहू ने अपनी मधुर आवाज़ से दर्शकों का मन मोह लिया.
पहली बार जाज्वल्यदेव महोत्सव में प्रस्तुति देने का मौका मिला. छत्तीसगढ़ मेरा दूसरा घर है-इशिका विश्वकर्मा, सारेगामापा विनर
आरु साहू ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि संगीत से बचपन से जुड़ाव था, और पांच साल की उम्र में स्टेज में प्रस्तुति देना शुरू कर दी थी. दर्शकों का प्यार मिला और आरु साहू ने कहा कि उन्हें ये कला ईश्वर से मिली है.
क़ृषि और लोक कला को आगे बढ़ाने के लिए जांजगीर में आयोजित जाज्वल्य देव लोक कला एवं एग्रीटेक कृषि मेला जिला ही नहीं छत्तीसगढ़ में अपनी विशेष पहचान बना लीं है. किसान इस मेला में आकर उन्नत कृषि के जीवंत प्रदर्शन को समझ कर आधुनिक क़ृषि से जुड़ते है. वही स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच भी उपलब्ध होता है.