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फाइलेरिया मुक्त होगा बलौदाबाजार: कलेक्टर और अधिकारियों ने खुद खाई दवा, आम जनता से की अपील

बलौदाबाजार: राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत जिले में सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम की शुरुआत की गई. कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर दीपक सोनी सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने खुद फाइलेरिया रोधी दवा खाकर अभियान की शुरुआत की. प्रशासन का उद्देश्य है कि लोग बिना डर के दवा लें और इस बीमारी को जड़ से खत्म करने में सहयोग करें. स्वास्थ्य विभाग की टीम की निगरानी में सभी ने दवा का सेवन किया. अधिकारियों ने बताया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है.

क्या है फाइलेरिया?

फाइलेरिया एक मच्छर से फैलने वाली बीमारी है. यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को कमजोर कर देती है. लंबे समय तक रहने पर हाथ-पैर में सूजन, विकलांगता और कई सामाजिक-आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसे हाथीपांव भी कहा जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी से बचाव का सबसे असरदार तरीका है सभी पात्र लोगों को एक साथ दवा देना, ताकि संक्रमण की कड़ी टूट सके.

कलेक्टर ने की लोगों से अपील

कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सभी लोगों की भागीदारी जरूरी है. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें. उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोग दवा नहीं लेते हैं, तो बीमारी का खतरा बना रहता है. इसलिए हर पात्र व्यक्ति का दवा सेवन करना जरूरी है.

जिले में पूरी तैयारी

प्रशासन ने अभियान के लिए पूरी तैयारी कर ली है. स्वास्थ्य टीमों का गठन किया गया है, दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही कर्मचारियों को प्रशिक्षण और बूथों का चिन्हांकन किया गया है. कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि अभियान की लगातार निगरानी की जाए और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाए.

अभियान की तारीखें

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने बताया कि यह अभियान 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक चलेगा.

  • 10 से 12 फरवरी: बूथ पर दवा सेवन
  • 13 से 22 फरवरी: घर-घर जाकर दवा दी जाएगी
  • 23 से 25 फरवरी: छूटे हुए लोगों के लिए मॉप-अप राउंड

दवा से घबराएं नहीं

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि दवा लेने के बाद हल्का सिरदर्द या चक्कर आ सकता है, जो सामान्य है और कुछ समय बाद ठीक हो जाता है. किसी भी समस्या पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें. हालांकि दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवा नहीं दी जाएगी.

सकारात्मक संदेश

कलेक्टर और अधिकारियों द्वारा खुद दवा लेना लोगों के लिए भरोसे का संदेश है. अगर सभी लोग सहयोग करेंगे, तो आने वाले समय में जिला फाइलेरिया मुक्त बन सकता है.