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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शिव पूजा में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, पुण्य की जगह लग सकता है दोष!

Mahashivratri Vrat ke Niyam: महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन पर्वों में से एक है. इस दिन भक्त व्रत रखकर, रात्रि जागरण कर और शिवलिंग पर जल-अभिषेक कर भोलेनाथ की विशेष कृपा पाने की कामना करते हैं. पंचांग के अनुसार साल 2026 में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, लेकिन अगर पूजा-व्रत में कुछ गलतियां हो जाएं, तो इसका फल उल्टा भी हो सकता है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि के दिन कौन-सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए.

महाशिवरात्रि के दिन न करें ये काम!

केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था. इसलिए भूलकर भी इसे शिवलिंग पर न अर्पित करें.

सिंदूर या कुमकुम: शिवजी वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, जिसे महादेव पर नहीं चढ़ाया जाता. उनकी पूजा में भस्म का उपयोग सही माना जाता है.

तुलसी दल: भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है. इसकी जगह आप बेलपत्र का इस्तेमाल करें.

हल्दी: हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य से है, जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है. इसलिए शिवजी को हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए.

बेलपत्र चढ़ाते समय रखें ध्यान

हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं. पत्तियां कहीं से कटी-फटी या सूखी नहीं होनी चाहिए. वहीं बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

शंख से जल अर्पित करना

भगवान विष्णु की पूजा में शंख अनिवार्य है, लेकिन शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित है. शास्त्रों के अनुसार, महादेव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए शिवलिंग का अभिषेक शंख से नहीं करना चाहिए. इसके लिए तांबे या पीतल के लोटे का उपयोग करें.

खान-पान और व्यवहार की सावधानियां

तामसिक भोजन: महाशिवरात्रि के दिन प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें.

काले कपड़े: पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. इस दिन हरा, सफेद या पीला रंग शुभ माना जाता है.

अनुशासन: इस दिन किसी का अपमान न करें, न ही घर में क्लेश करें. शिव भक्ति में मन को शांत रखें.

शिवलिंग की आधी परिक्रमा न करें?

अक्सर लोग जोश में आकर शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कर लेते हैं, लेकिन नियम के अनुसार शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है (जिसे जलाधारी या निर्मली कहते हैं), उसे लांघना अशुभ माना जाता है. हमेशा वहीं से वापस मुड़ जाना चाहिए.