Shambhavi Pathak: क्या कुंडली में लिखा था विमान हादसा? पायलट शांभवी ने दादा-दादी को आखिरी मैसेज में क्या लिखा?
ग्वालियर: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत 5 लोगों का बुधवार सुबह एक प्लेन क्रैश हादसे में निधन हो गया. अजित पवार पंचायत चुनाव के प्रचार के लिए प्राइवेट चार्टर प्लेन से बारामती जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ. इस हादसे में जिन 5 लोगों की मौत हुई है, उसमें सह पायलट शांभवी पाठक भी शामिल है. शांभवी मूलरूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली थीं और उनकी शुरुआती स्कूल शिक्षा भी यहीं से हुई थी. वह अक्सर अपने परिवार से मिलने ग्वालियर आती थीं, यहां उनकी दादी मीरा पाठक रहती हैं. इस दुख भरे समय में ईटीवी भारत ने मीरा पाठक से खास बातचीत की.
परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
ग्वालियर के शारदा विहार कॉलोनी में शांभवी की दादी मीरा पाठक रहती हैं. उनकी आंखों में आंसू हैं, दिल टूट चुका है जब से पता चला है कि उनकी पोती अब कभी उनसे मिलने नहीं आएगी क्योंकि पायलट शांभवी पाठक की मौत बुधवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के साथ प्लेन क्रैश में हो गई. इस प्राइवेट प्लेन में शांभवी डिप्टी सीएम अजित पवार को मुंबई से बारामती चुनाव प्रचार के लिए लेकर जा रही थीं.
दादी को किया था आखिरी मैसेज
ईटीवी भारत से बातचीत में शांभवी की दादी मीरा पाठक ने बताया कि “मुझे इस दुखद घटना की जानकारी सुबह 11 बजे उनके छोटे बेटे से मिली. उन्होंने सीधे तौर पर नहीं बताया था, सिर्फ डिप्टी सीएम के बारे में बताया था. मुझे बोले थे कि शांभवी के पिता से इसके बारे में पता करें. क्योंकि उन्हें ये पता था कि शांभवी कल ही मुंबई चली गई है. मैं अपने बड़े बेटे यानी शांभवी के पिता को कॉल किया था. उस वक्त कॉल नहीं लगा, लेकिन बाद में उनका फोन आया, वो रो रहे थे और उन्होंने बताया की ऐसा हो गया है.”
मैसेज के रिप्लाई का इंतजार करती रहीं दादी
मीरा पाठक ने आगे बताया कि “उनकी शांभवी से फोन पर आखिरी बार कब बात हुई थी याद नहीं, क्योंकि बच्चे अपने आप में मस्त रहते हैं, लेकिन आज सुबह ही उसका व्हाट्सएप पर मैसेज आया था. उन्होंने लिखा था ‘हाय दद्दा गुड मॉर्निंग’. जबकि वह बहुत कम मैसेज करती थी. वह प्यार से मुझे दद्दा कहती थीं. घर में सभी शांभवी को चीनी कहते हैं. मैंने रिप्लाई में ‘गुड मॉर्निंग चीनी’ लिखकर दिया था. लेकिन उसने वाह मैसेज देखा नहीं.”
कुंडली में लिखा था नाम रोशन करेगी
जब हमने उनसे जानना चाहा कि “शांभवी फ्लाइंग सर्विसेज की ओर कैसे आकर्षित हुई तो उनका कहना था कि “इस बारे में कैसे बताएं, जब उसका चयन हो गया तब पता चला था. इससे हम खुश थे. वह होनहार लड़की थी जब उसका सिलेक्शन हो गया तब बताया गया हम गर्व महसूस कर रहे थे. कुछ समय पहले एक पंडित ने उसकी कुंडली देखी थी. जिसके बाद उन्होंने बताया कि वह आने वाले 2026-27 में बड़ा नाम रोशन करेगी. लेकिन ये नहीं पता था कि ऐसे नाम रोशन होगा.
पिता और बेटी दोनों एक ही कंपनी में पायलट
दुख की इस घड़ी में शांभवी के साथ उनके रिश्तेदार भी परिवार के पास पहुंच रहे हैं. दादी मीरा की भाभी मीनाक्षी तिवारी से बातचीत में कहा कि “शांभवी बचपन से ही चुलबुली थी. वह पढ़ाई में तेज और इंटेलिजेंट थी सभी उसे प्यार करते थे. कुछ समय पहले ही शांभवी और उनके पिता विक्रम ने वीएसआर वेंचर में साथ काम करना भी शुरू कर दिया था.”
मजाक मजाक में कहती घर की एयरलाइन खोलेंगे
दोनों अक्सर घर में हंसी मजाक करते और कहते थे कि क्यों ना घर की ही एयरलाइन खोल लें. पापा भी पायलट और वह भी, एक अच्छा सा नाम रख लेंगे. शांभवी के बारे में न्यूज देखने पर पता चला कि उसकी मृत्यु हो गई है. उसके माता-पिता और छोटा भाई वरुण अभी मुंबई में हैं.”
शांभवी के शिवराज थे फेवरेट
मीनाक्षी अक्सर मुंबई से फ्लाई करती थी. ऐसे में कई बड़े सेलिब्रिटी, एक्टर्स और सिंगर्स के लिए फ्लाइट उड़ाई है. जिसमें सलमान खान, आमिर खान, राहुल गांधी और मोहन याद जैसे बड़े नाम शामिल है. लेकिन शांभवी शिवराज सिंह चौहान को बहुत पसंद करती थी. वे बहुत ही अच्छे से पेश आते थे उसके साथ.
शांभवी ने इंदौर में ली थी ट्रेनिंग
शांभवी पाठक ने इंदौर के द मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब लिमिटेड से पायलट की ट्रेनिंग ली थी, यहां उन्होंने करीब 40 घंटे ट्रेनिंग ली थी. उन्हें ट्रेनिंग देने वाले कैप्टन मंदार महाजन ने बताया कि “शांभवी ने साल 2018-19 में ट्रेनिंग ली थी. मैंने खुद उन्हें प्लेन किस तरह से उड़ाना है उसकी ट्रेनिंग दी थी. इस दौरान 40 घंटे की फ्लाइंग उन्होंने की थी और तीन से चार महीने इंदौर में रहीं थी. तीन साल से वह फ्लाइंग कर रही थीं. उसका स्वभाव काफी अच्छा था और काफी ब्रिलियंट स्टूडेंट थी.”
कैप्टन मंदार महाजन ने आगे बताया कि “शांभवी के पिता भी पायलट हैं और उसका ड्रीम एकदम क्लियर था. शांभवी अपने पिता की तरह तैयारी कर रही थीं. वह ट्रेनिंग के दौरान अन्य बच्चों से काफी बेहतर थीं और खुद ही काफी सीखने का प्रयास करती थीं. घटना काफी दुखद है क्योंकि वह को पायलट थीं. मैं उस प्लेन के पायलट सुमित कपूर को भी पर्सनली जानता था. वह काफी सीनियर पायलट थे और सहारा बंद होने के बाद वह प्राइवेट फ्लाइट उड़ा रहे थे.