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“Chinese Visa Scam: जस्टिस ने कार्ति चिदंबरम मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग; जानें क्या है ‘Recusal’ और इसके कारण

चीनी वीजा स्कैम मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिंदबरम ने ट्रायल कोर्ट के आदेश दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. इस मामले में अभी तक कोर्ट में सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है. इस बार भी एक जस्टिस ने इस सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. इससे पहले भी एक जस्टिस खुद को इस पूरे मामले से अलग कर चुके हैं.

दरअसल, चीनी वीजा स्कैम मामले में ट्रायल कोर्ट ने कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिंदबरम पर आरोप तय कर दिए हैं. चिदंबरम ने 23 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए चुनौती दी है. 19 जनवरी को इस मामले में जस्टिस अनूप जयराम भंभानी को सुनवाई करनी थी, लेकिन उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया. इससे पहले 15 जनवरी को जस्टिस अनूप को सुनवाई करनी थी, लेकिन उन्होंने इसे 19 जनवरी तक टाल दिया था. अब उन्होंने इस मामले से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है. अभी तक इसकी कोई वजह सामने नहीं आई है.

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने भी किया था किनारा

इस मामले में इससे पहले भी एक जस्टिस खुद को अलग कर चुके हैं. पिछली सुनवाई में जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने सुनवाई से खुद को अलग किया था. अभी तक यह समझ नहीं आ रहा है कि जज खुद को सुनवाई से अलग क्यों कर रहे हैं. आखिर ऐसी क्या वजह है जो जस्टिस को सुनवाई करने से रोक रही है. हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी तक कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिंदबरम की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जनवरी को अन्य बेंच द्वारा की जाएगी.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल चीनी वीजा स्कैम मामले में ट्रायल कोर्ट ने कांग्रेस सांसद और 6 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे. जबकि चेतन श्रीवास्तव को इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया गया था. इस मामले में अक्टूबर 2024 में सीबीआई ने कार्ति चिदंबरम और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जो 2011 में उनके पिता पी. चिदंबरम के केंद्रीय गृह मंत्री रहते हुए एक पावर कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के लिए चीनी नागरिकों के वीजा में कथित रिश्वत के मामले से जुड़ी थी.

आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप

23 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम और छह अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का आदेश दिया था. सीबीआई ने आरोप लगाया गया था कि टीएसपीएल के एक कार्यकारी ने कार्ति चिदंबरम से उनके नजदीकी सहयोगी एस. भास्कररमण के माध्यम से संपर्क किया था. कार्ति चिदंबरम के अलावा उनके कथित नजदीकी सहयोगी और चार्टर्ड अकाउंटेंट एस. भास्कररमण, वेदांता की सहायक कंपनी टीएसपीएल और मुंबई स्थित बेल टूल्स के माध्यम से कथित तौर पर रिश्वत दी गई थी.