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PF यूजर्स की मौज! अब UPI से चुटकियों में निकलेगा पैसा, 1 अप्रैल से बदलने जा रहा है पीएफ निकासी का पूरा सिस्टम

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अंशधारक इस साल अप्रैल तक यूपीआई के जरिए अपनी भविष्य निधि से निकासी कर सकेंगे और वह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच जाएगी. आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस योजना में सदस्यों का कुछ हिस्सा न्यूनतम राशि के रूप में सुरक्षित रहेगा, जबकि शेष राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जा सकेगी. ईपीएफओ मेंबर्स अपनी कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से अपने यूपीआई पिन का इस्तेमाल कर सुरक्षित लेनदेन कर सकेंगे. धनराशि बैंक खाते में आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, एटीएम या डेबिट कार्ड से इस्तेमाल की जा सकेगी.

खामियों को दूर करने का प्रयास

सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) इस सिस्टम के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सॉफ्टवेयर संबंधी खामियों को दूर करने का प्रयास कर रहा है. फिलहाल ईपीएफओ सदस्यों को भविष्य निधि से निकासी के लिए आवेदन करना पड़ता है, जो समय लेने वाला प्रोसेस है. ऑटोमैटिक सेटलमेंट प्रोसेस के तहत आवेदन देने के तीन दिन के भीतर धनराशि अकाउंट में आती है. इस तरीके से निकासी की सीमा पहले एक लाख रुपए थी लेकिन उसे बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है. इससे सदस्य बीमारी, शिक्षा, विवाह और घर खरीद जैसी जरूरतों के लिए तीन दिन के भीतर ही वित्तीय सहायता पा सकेंगे.

कोविड में शुरू हुआ ये सिस्टम

ईपीएफओ ने कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय संकट से जूझ रहे लोगों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए अग्रिम दावों के ऑनलाइन ऑटो-सेटलमेंट की शुरुआत की थी. हालांकि, ईपीएफ से विड्रॉल के लिए सभी अंशधारकों को दावा दाखिल करना पड़ता है. इस समय लेने वाले प्रोसेस से बचने और ईपीएफओ पर बोझ कम करने के लिए नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है. इसका कारण हर साल पांच करोड़ से अधिक दावे निपटाए जाते हैं. इनमें से ज्यादातर ईपीएफ निकासी के लिए होते हैं. सूत्रों ने बताया कि ईपीएफओ अपने सदस्यों को सीधे ईपीएफ खातों से पैसे निकालने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि उसके पास कोई बैंकिंग लाइसेंस नहीं है. हालांकि, सूत्रों ने कहा कि सरकार ईपीएफओ की सेवाओं को बैंकों जैसा बेहतर बनाना चाहती है.

अक्टूबर में दी गई थी मंजूरी

अक्टूबर, 2025 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी मंडल ने ईपीएफ से आंशिक निकासी के प्रावधानों को सरल और लचीला बनाने को मंजूरी दी थी. इसमें 13 जटिल प्रावधानों को तीन श्रेणियों- आवश्यक जरूरतों (बीमारी, शिक्षा एवं शादी), आवासीय जरूरतों और विशेष परिस्थितियों में समाहित कर दिया गया है. अब सदस्य अपनी भविष्य निधि से निकासी के लिए पात्र राशि का 100 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे, जबकि 25 प्रतिशत न्यूनतम राशि सुरक्षित रहेगी ताकि अंशधारक को उच्च ब्याज दर (वर्तमान में 8.25 प्रतिशत) और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलना जारी रहे.

ईपीएफओ का उद्देश्य इस सुधार से सदस्यों के लिए आसान, तेज और सुरक्षित ईपीएफ निकासी को सुनिश्चित करना है. यह पहल लगभग आठ करोड़ अंशधारकों के लिए लाभकारी होगी और ईपीएफओ के संचालन बोझ को भी कम करेगी. सरकार को उम्मीद है कि किसी दस्तावेज की जरूरत के बगैर और स्वचालित-निपटान वाली यह योजना कर्मचारियों के जीवन को सरल बनाएगी और उनकी वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करेगी.