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500 रुपये के स्टांप पर ठेकेदार को दे दिया अपना पद, MP में महिला सरपंच का कारनामा, क्या हुआ एक्शन?

मध्य प्रदेश के नीमच से अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां ग्राम पंचायत दांता की सरपंच कैलाशी बाई कच्छावा को पद से हटा दिया गया है. कुछ दिन पहले उन्होंने 500 रुपये के स्टाम्प पर ठेकेदार सुरेश गरासिया को पंचायत के सभी कार्य सौंपने का अनुबंध किया था. तभी से यह मामला सुर्खियों में बना हुआ था. जांच में अनुबंध पत्र की फोटोकॉपी सामने आई, जिसमें लिखा गया था कि कैलाशी बाई पंचायत का काम करने में असमर्थ हैं. इसलिए उन्होंने सुरेश गरासिया को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है.

अनुबंध में यह भी उल्लेख है कि मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, वाटरशेड सहित सभी सरकारी योजनाओं के कार्य अब सुरेश ही देखेंगे. सरपंच ने यह भी लिखा कि जब तक वह पद पर रहेंगी, तब तक सुरेश ही सभी कार्य करेंगे. किसी भी स्थिति में वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगी.

6 फरवरी को नोटिस जारी किया गया

इस मामले में जिला पंचायत ने 6 फरवरी को कैलाशी बाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. 8 फरवरी को उन्होंने लिखित जवाब में कहा कि ऐसा कोई अनुबंध उन्होंने नहीं किया, वायरल हो रहा अनुबंध फर्जी है और उनके हस्ताक्षर भी नकली हैं. ग्राम पंचायत सचिव जीवन लाल पाटीदार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. उन्होंने 8 फरवरी 2025 को जवाब दिया कि उन्हें इस अनुबंध की कोई जानकारी नहीं है. पंचायत के सभी कार्य कैलाशी बाई ही देख रही थीं.

स्टाम्प से हुई पुष्टि

जांच में उप पंजीयक रामपुरा से अनुबंध के रजिस्ट्रेशन की जानकारी मांगी गई. 10 फरवरी को उपपंजीयक ने बताया कि यह अनुबंध उनके कार्यालय में पंजीकृत नहीं हुआ. अनुबंध पत्र में गवाह बने सदाराम और मन्नालाल को भी बयान के लिए बुलाया गया. दोनों ने कहा कि अनुबंध के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. अनुबंध पर उनके हस्ताक्षर भी फर्जी हैं. स्टाम्प वेंडर से जानकारी ली गई. स्टाम्प खरीदने की रसीद में कैलाशी बाई का नाम दर्ज था. इससे पुष्टि हुई कि अनुबंध में इस्तेमाल स्टाम्प उन्होंने ही खरीदा था.

सरपंच पद से हटाया गया

जांच में पाया गया कि कैलाशीबाई ने अपने अधिकार ठेकेदार को सौंप दिए, जो पंचायती राज व्यवस्था के खिलाफ हैं. इसे जनहित के विरुद्ध मानते हुए उन्हें मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत सरपंच पद से हटा दिया गया है.