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भारत में भी पहुंचा चीन वाला HMPV वायरस, क्या फिर आएगी कोई नई महामारी

भारत में भी Human Metapneumovirus के 2 मामले दर्ज किए गए हैं. बीते कुछ दिनों से ये वायरस चीन में मौजूद है और वहां इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. चीन में बड़ी संख्या में बच्चे अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं. चीन की खबरे सामने आने के बाद 5 दिन के भीतर ही इस वायरस के दो केसकर्नाटक में मिले हैं. आईसीएमआर ने दोनों मामलों की पुष्टि की है. एचएमपीवी वायरस के मामले भारत में आने के बाद यहां भी सरकार अलर्ट पर है. इस वायरस के अधिकतर लक्षण कोरोना जैसे ही हैं. यह फैलता भी कोविड की तरह है. ऐसे में चिंता बढ़ गई है. डर सता रहा है कि क्या फिर कोविड जैसे कोई महामारी आएगी.

एचएमपीवी (ह्यूमन मेटाप्न्यूमोवायरस) एक प्रकार का ऐसा वायरस है सांस की नली में प्रवेश करके लंग्स तक जाता है. कोविड भी बिलकुल ऐसा ही था. दोनों वायरस के लक्षण भी एक जैसे ही हैं. हालांकि एचएमपीवी वायरस मुख्य रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को संक्रमित करता है. इस वायरस से संक्रमित होने के बादसबसे आम लक्षण खांसी है, जो अक्सर बलगम के साथ होती है. इसके साथ हल्का बुखार भी आता है. इस वायरस से संक्रमित होने के बाद कुछ मामलों में गंभीर लक्षण आ सकते हैं. इसमें सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, जो अक्सर सीने में दर्द के साथ होती है.

एचएमपीवायरस के साथ सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये निमोनिया भी करता है. निमोनिया एक ऐसी बीमारी है जो बच्चों की मौत का कारण बन सकती है. यह वायरस एक से दूसरे बच्चे में तेजी से फैलता है और जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली ( इम्यूनिटी) कमजोर है, वह एचएमपीवी वायरस के संपर्क में आने के बाद ज्यादा बीमार पड़ सकते हैं.

नहीं है कोई वैक्सीन और दवा

इस वायरस के इलाज के लिए कोई निर्धारित दवा या बचाव के लिए कोई वैक्सीन नहीं है. केवल लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है. एचएमपीवी वायरस के दौरान तरल पदार्थों का सेवन करना महत्वपूर्ण है, ताकि शरीर को हाइड्रेटेड रखा जा सके. बुखार होने पर बच्चों को पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन दी जाती है. कुछ मामलों मे एचएमपीवी वायरस के कारण बैक्टीरियल संक्रमण होता है, तो एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जा सकता है. लेकिन इस वायरस के इलाज के लिए कोई निर्धारित दवा नहीं बनी है.

क्या फिर से आएगी कोई नई महामारी?

महामारी विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार बताते हैं कि एचएमपीवी वायरस का केस भारत में आना अच्छा संकेत नहीं है. चूंकि यहां आबादी घनी है तो वायरस का ट्रांसमिशन तेजी से हो सकता है. ऐसे में अलर्ट मोड पर काम करने की जरूरत है. फिलहाल जरूरी ये है कि संक्रमित बच्चों के संपर्क में आ चुके बच्चों की ट्रेसिंग की जाए और उनको आइसोलेट करें.

इस वायरस से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करें और जैसे कोविड वायरस से बचने के नियमों का पालन किया गया था वैसे ही इससे बचें. इसके लिए हाथ धोकर भोजन करें और किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में न आएं.अगर इस वायरस के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं. इस मामले में लापरवाही न करें. जहां तक किसी नई महामारी की बात है तो फिलहाल ऐसा खतरा नहीं है. क्योंकि एचएमपीवी कोई नया वायरस नहीं है और इसके अधिकतर मामले हल्के लक्षण वाले ही रहते हैं.