ब्रेकिंग
Operation Sankalp to Urja Suraksha: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारतीय नौसेना का सबसे खतरनाक और बड़ा रेस... Delhi Terror Plot: पाकिस्तान से रची जा रही दिल्ली दहलाने की साजिश; ISI समर्थित TTH मॉड्यूल के 8 आतंक... Manipur Encounter: भारतीय सेना और असम राइफल्स की बड़ी कार्रवाई; चुराचांदपुर में UKNA उग्रवादी ढेर India-USA Relations: गृह मंत्री अमित शाह और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बैठक; आतंकवाद और ड्रग्स तस... NEET Paper Leak News: 'पेपर लीक रोकने के उपाय या कॉमेडी सर्कस?' नीट विवाद पर केजरीवाल का केंद्र सरका... Doctor Kills Domestic Help: दिल्ली के पॉश इलाके में सनसनी; डॉक्टर के घर काम करने वाली महिला की हत्या... Shiv Sena UBT Crisis: उद्धव ठाकरे की बैठक से 6 सांसद नदारद; क्या टूटने वाली है शिवसेना UBT? जानें का... Bihar Heli Tourism: पटना से अब राजगीर, कैमूर और वाल्मीकिनगर तक होगी हवाई यात्रा; जानें किराया और पर्... Ranchi Police Encounter: आरएसएस कार्यालय हमला केस का मुख्य आरोपी घायल; हथियार छीनकर भागने की कोशिश म... MP Archaeological Survey: पुजारी के निजी संग्रह से मिला झांसी रियासत का बैज और दुर्लभ सामूहिक चित्र;...

दमनकारी शासन ने ली थी 13 मासूमों की जान, शहीद दिवस को याद करके ममता ने CPIM पर साधा निशाना

21 जुलाई का दिन बंगाल के लिए काफी महत्वपूर्ण दिन रहने वाला है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस इस दिन को शहीद दिवस के तौर पर मनाने वाली है. इस दिन की बात करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPIM) पर निशाना साधा है. इसके अलावा उन्होंने इस दिन को पार्टी के लिए भावनात्मक मील का पत्थर कहा है.

31 साल पहले यानी 21 जुलाई 1993 के दिन को याद करते हुए ममता बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने सीपीआई(एम) पर हमला बोलते हुए कहा कि 31 साल पहले इसी दिन दमन के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में मैंने अपने साथियों को खो दिया था, इस दमनकारी शासन ने उन 13 मासूम लोगों की जान ले ली थी. उन्होंने इस दिन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि 21 जुलाई बंगाल के इतिहास में एक खूनों से भरा हुआ दिन है. कल फिर 21 जुलाई आ रही है., जो क बंगाल की लोक संस्कृति का एक ऐसा अंग है जिसे कभी अलग नहीं किया जा सकता है.

क्या हुआ था 31 साल पहले, जिसमें मरे थे 13 लोग

21 जुलाई साल 1993 को ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस की एक रैली का आयोजन किया गया था, जिसमें वोटिंग के लिए मतदाता पहचान पत्र ही एकमात्र जरूरी डॉक्यूमेंट बनाया जाने की मांग की जा रही थी. इस रैली के ही दौरान कोलकाता में पश्चिम बंगाल पुलिस ने रैली पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई, जिसे कोलकाता में अपना वार्षिक ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम के तौर पर मनाया जाएगा.

‘मां-माटी-मानुष दिवस’ के तौर पर मनाया जाएगा

ममता ने एक्स पर पोस्ट करते हुए रैली के दौरान मारे गए लोगों को याद करते हुए लिखा कि हम हर साल इस ऐतिहासिक दिन पर उन वीर शहीदों को प्यार और सम्मान के साथ याद करते हैं, उनके साथ हम उन सभी को भी याद करते हैं जिन्होंने हमारे देश और साथी इंसानों के लिए आंदोलनों में अपने प्राणों की आहुति दी है. साथ ही हम इस दिन को ‘मां-माटी-मानुष दिवस’ के रूप में मनाते हैं, और अपनी लोकतांत्रिक चुनावी जीत को पश्चिम बंगाल के लोगों को समर्पित करते हैं. इस दिन का एक और स्थायी महत्व है. 21 जुलाई को हो रहे इस कार्यक्रम में ममता ने बंगाल के लोगों को भी इनवाइट किया है. उन्होंने कहा है कि बंगाल के सभी लोगों को आमंत्रित करती हूं.

हर साल की तरह, इस साल भी, मुझे विश्वास है कि शहीदों को सामूहिक श्रद्धांजलि देने में आपकी उत्सुकता पूर्ण भागीदारी से हमारी सभा सार्थक होगी. उन्होंने इस पोस्ट में खुद की एक कविता भी लिखी, जिसमें उन्होंने लिखा कि “21 जुलाई खून और आंसुओं से लथपथ है, शहीदों की याद में ढेर सारी श्रद्धांजलि.”